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विशु कुशवाहा जिला न्यायालय, गाज़ियाबाद और इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वकालत करने वाले अधिवक्ता हैं और उन्हें वकालत में 15 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उनका चैंबर राज नगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर (आरडीसी), गाज़ियाबाद के जिला न्यायालय परिसर में चैंबर 817 है। भूमि अभिलेख और राजस्व से जुड़े मामले तहसील परिसर स्थित चैंबर 80 से देखे जाते हैं।
कार्यक्षेत्र
अधिकांश काम गाज़ियाबाद की विचारण अदालतों का है:
- मजिस्ट्रेट और सत्र न्यायालय में तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जमानत और अग्रिम जमानत;
- आपराधिक विचारण, उन्मोचन प्रार्थना पत्र, पुनरीक्षण और अपील;
- परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत चेक बाउंस की शिकायत और बचाव;
- परिवार न्यायालय, गाज़ियाबाद में तलाक, बच्चों की अभिरक्षा और भरण-पोषण;
- धारा 498ए, दहेज और घरेलू हिंसा के मामले, दोनों ही पक्षों की ओर से;
- संपत्ति और दीवानी वाद: निषेधाज्ञा, विलेख निरस्तीकरण, बँटवारा, कब्ज़ा और धन वसूली;
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय में क्वैशिंग याचिकाएँ और रिट।
उन्होंने आरआईसीएस से रियल एस्टेट में एमबीए भी किया है। संपत्ति विवादों में यह बात जितनी सुनने में लगती है उससे कहीं ज़्यादा मायने रखती है: कुछ भी दाखिल करने से पहले काम का बड़ा हिस्सा स्वत्व की शृंखला, जीडीए की फाइलें, खतौनी की प्रविष्टियाँ और बिल्डर के अनुबंध पढ़ने में जाता है।
चैंबर के काम करने का तरीका
- पहले कागज़। सलाह दस्तावेज़ पढ़ने के बाद दी जाती है, फोन पर सुने गए विवरण के आधार पर नहीं।
- सीधी बात। आपको बताया जाएगा कि कानून किस बात की अनुमति देता है, किसकी नहीं, और वास्तविक समय-सीमा क्या हो सकती है। न किसी नतीजे का वादा किया जाता है, न किसी तारीख का, क्योंकि कोई भी ईमानदार अधिवक्ता ऐसा वादा नहीं कर सकता।
- तारीख पर चैंबर स्वयं पेश होता है। मामले आपको बताए बिना किसी और को नहीं सौंपे जाते, और हर सुनवाई के बाद आपको जानकारी दी जाती है।
- फीस पर बात कागज़ पढ़ने के बाद होती है। न्यायालय शुल्क और स्टाम्प शुल्क अलग हैं और कानून से तय होते हैं।
न्यायालय
- जिला एवं सत्र न्यायालय, गाज़ियाबाद (आरडीसी), जिसमें परिसर के मजिस्ट्रेट, सत्र और दीवानी न्यायालय तथा विशेष न्यायालय शामिल हैं
- परिवार न्यायालय, गाज़ियाबाद
- तहसील गाज़ियाबाद के राजस्व न्यायालय
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय
अन्य वेबसाइटें
इसी वकालत का विवरण lawaired.com और advocatevishukushwaha.com पर भी उपलब्ध है।
यह कानून की सामान्य जानकारी है, आपके मामले की सलाह नहीं। तथ्य बदलने से नतीजे बदल जाते हैं, इसलिए अपने मामले के बारे में किसी अधिवक्ता से बात करें।