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गाज़ियाबाद में संपत्ति के विवाद दो अलग पटरियों पर चलते हैं, और लोग अक्सर इन्हें आपस में उलझा देते हैं। कृषि भूमि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 (यूपी राजस्व संहिता) के अधीन आती है और उसके मामले ज़्यादातर तहसील और एसडीएम के राजस्व न्यायालयों में निपटते हैं। मकान, फ़्लैट, विकसित कॉलोनियों के प्लॉट और रुपये-पैसे के दावे आरडीसी स्थित सिविल न्यायालयों में जाते हैं। ग़लत मंच पर वाद दायर करने से एक साल बर्बाद हो सकता है। इस पृष्ठ में बताया गया है कि आपका विवाद किस पटरी पर है और हर पटरी पर क्या किया जा सकता है।
सिविल न्यायालय या राजस्व न्यायालय?
| विवाद | सामान्य मंच |
|---|---|
| मृत्यु या बिक्री के बाद कृषि भूमि का दाखिल-ख़ारिज | तहसीलदार, तहसील गाज़ियाबाद (यूपी राजस्व संहिता) |
| भूमिधर के रूप में धारित कृषि भूमि का बंटवारा | एसडीएम, यूपी राजस्व संहिता की धारा 116 के अंतर्गत राजस्व वाद के रूप में |
| कृषि खेतों के बीच सीमा विवाद | राजस्व अधिकारी (यूपी राजस्व संहिता की धारा 24) |
| मकान, फ़्लैट या आवासीय प्लॉट पर स्वामित्व, कब्ज़ा या निषेधाज्ञा | सिविल जज, गाज़ियाबाद |
| धोखे से कराए गए बैनामे, दानपत्र या वसीयत का निरस्तीकरण | सिविल जज, गाज़ियाबाद |
| मकान या अन्य ग़ैर-कृषि संपत्ति का बंटवारा | सिविल जज, गाज़ियाबाद |
| पंजीकृत परियोजना में बिल्डर की देरी या रिफ़ंड | उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) या उपभोक्ता आयोग |
| अनुबंध, ऋण या बिल के अंतर्गत रुपये की वसूली | दावे के अनुसार सिविल जज या वाणिज्यिक न्यायालय |
कृषि भूमि के अभिलेख, यानी खतौनी और खसरा, तहसील में रखे जाते हैं। पंजीकृत दस्तावेज़ उप-निबंधक कार्यालय में रहते हैं। अकेले बैनामे से खतौनी नहीं बदलती; दाखिल-ख़ारिज का आवेदन अलग से करना पड़ता है। यही कारण है कि कोई ख़रीदार रजिस्ट्री के काग़ज़ पर भूमि का मालिक हो सकता है और फिर भी तहसील के अभिलेख में उसका नाम दर्ज न हो।
सिविल न्यायालय में वाद
निषेधाज्ञा
जब कोई आपके प्लॉट पर निर्माण करने, उसे बेचने या आपको वहाँ से निकालने वाला हो, तो पहला कदम प्रायः विशिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 की धारा 38 के अंतर्गत स्थायी निषेधाज्ञा का वाद होता है। इसके साथ सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के आदेश 39 नियम 1 और 2 के अंतर्गत अस्थायी निषेधाज्ञा का प्रार्थना पत्र दिया जाता है। अंतरिम आदेश पाने के लिए न्यायालय को तीन बातों पर संतुष्ट होना पड़ता है: प्रथम दृष्टया मामला, आदेश न मिलने पर अपूरणीय क्षति, और सुविधा का संतुलन आपके पक्ष में। अत्यावश्यक मामलों में पहले ही दिन एकपक्षीय आदेश पारित हो सकता है, जिसके बाद दूसरे पक्ष को नोटिस भेजा जाता है।
घोषणा और निरस्तीकरण
यदि आपकी संपत्ति पर कोई कूटरचित या कपटपूर्ण दस्तावेज़ रजिस्टर्ड हो गया है, तो आप विशिष्ट अनुतोष अधिनियम की धारा 31 के अंतर्गत उसे निरस्त कराने का वाद दायर कर सकते हैं। स्वामित्व की घोषणा धारा 34 के अंतर्गत माँगी जा सकती है, आमतौर पर कब्ज़े या निषेधाज्ञा के साथ, क्योंकि जब आगे का अनुतोष उपलब्ध हो तो केवल घोषणा की माँग अक्सर अस्वीकार कर दी जाती है।
कब्ज़ा और बंटवारा
स्वामित्व के आधार पर कब्ज़े का वाद उस समय से 12 साल के भीतर दायर किया जा सकता है जब दूसरे व्यक्ति का कब्ज़ा आपके विरुद्ध प्रतिकूल हुआ (परिसीमा अधिनियम का अनुच्छेद 65)। वारिसों के बीच मकान का बंटवारा पहले प्रारंभिक डिक्री से तय होता है, जिसमें हिस्से निश्चित किए जाते हैं, और फिर अंतिम डिक्री से, जिसमें संपत्ति को माप और सीमा के अनुसार बाँटा जाता है या उसकी बिक्री का आदेश दिया जाता है।
विक्रय अनुबंध
यदि विक्रेता बयाना लेने के बाद मुकर जाए, तो ख़रीदार तीन साल के भीतर विनिर्दिष्ट पालन का वाद दायर कर सकता है। विशिष्ट अनुतोष अधिनियम में 2018 के संशोधन के बाद विनिर्दिष्ट पालन पुराने अर्थ में न्यायालय के विवेक पर निर्भर नहीं रहा। जब तक अधिनियम के अपने अपवाद लागू न हों, न्यायालय को वैध अनुबंध लागू कराना ही होता है। ख़रीदार को फिर भी यह दिखाना पड़ता है कि वह शेष रकम चुकाने के लिए हमेशा तैयार और तत्पर रहा।
रुपये की वसूली
लिखित अनुबंध, ऋण समझौते, विनिमय-पत्र या चेक के अंतर्गत बकाया रकम के लिए सीपीसी के आदेश 37 के अंतर्गत संक्षिप्त वाद साधारण वाद से तेज़ चलता है। प्रतिवादी को बचाव करने के लिए न्यायालय की अनुमति लेनी पड़ती है, और जहाँ बचाव खोखला हो वहाँ अनुमति नहीं दी जाती। वाणिज्यिक लेन-देन से उत्पन्न निर्धारित मूल्य के दावे वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015 के अंतर्गत वाणिज्यिक न्यायालय में जाते हैं। उस रास्ते में पहले वाद-पूर्व मध्यस्थता से गुज़रना ज़रूरी है, जब तक कि अत्यावश्यक अंतरिम राहत न माँगी जा रही हो। ज़्यादातर रुपये के दावों की परिसीमा तीन साल है। बाउंस हुए चेक पर आपराधिक शिकायत भी हो सकती है, जिसका ब्योरा चेक बाउंस पृष्ठ पर दिया गया है।
गाज़ियाबाद में संपत्ति ख़रीदने से पहले
- स्वामित्व की शृंखला। कम से कम 30 साल के पंजीकृत दस्तावेज़ों से स्वामित्व का क्रम खंगालें और जाँचें कि हर अंतरण उसी व्यक्ति ने किया जो वास्तव में उसका हक़दार था।
- भार की खोज। उप-निबंधक के अभिलेखों में उसी संपत्ति पर बंधक, विक्रय अनुबंध या पहले हुई बिक्री की तलाश करें।
- तहसील के अभिलेख। भूमि के लिए तहसील में खतौनी देखें। विक्रेता भूमिधर के रूप में दर्ज होना चाहिए, और भूमि ग्राम सभा, सीलिंग या अधिग्रहीत भूमि नहीं होनी चाहिए।
- प्राधिकरण की स्वीकृतियाँ। विकसित क्षेत्रों के प्लॉट और भवनों के लिए जीडीए या संबंधित प्राधिकरण के आवंटन, मानचित्र स्वीकृति और पूर्णता के अभिलेख जाँचें। परियोजनाओं के लिए यूपी रेरा की वेबसाइट पर पंजीकरण देखें।
- लंबित मुकदमे। विक्रेता के नाम और संपत्ति के विवरण से जिला न्यायालय और उच्च न्यायालय के मुकदमों के अभिलेख खोजें।
सावधानी से की गई जाँच का ख़र्च ग़लत ख़रीद को पलटने के वाद से कहीं कम पड़ता है।
साथ लाने वाले काग़ज़ात
- बैनामा, दानपत्र, वसीयत, आवंटन पत्र या विक्रय अनुबंध।
- भूमि के लिए खतौनी और खसरा की नकल, या मकान के लिए गृहकर की रसीदें और बिजली के बिल।
- मौके की फ़ोटो, और जीडीए, पुलिस या तहसील से मिला कोई नोटिस या आदेश।
- रुपये के दावों के लिए: अनुबंध, बिल, बहीखाता, बैंक प्रविष्टियाँ और पत्राचार।
लोग अक्सर पूछते हैं
कोई मेरे प्लॉट पर निर्माण कर रहा है। मैं तुरंत क्या कर सकता हूँ?
स्थायी निषेधाज्ञा का वाद दायर करें और उसके साथ सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के आदेश 39 नियम 1 और 2 के अंतर्गत अस्थायी निषेधाज्ञा का प्रार्थना पत्र लगाएँ। अत्यावश्यक मामलों में सिविल न्यायालय पहले ही दिन अंतरिम आदेश दे सकता है। आने से पहले निर्माण की तारीख़ सहित फ़ोटो खींच लें।
मैंने कृषि भूमि ख़रीदी, पर खतौनी में अब भी विक्रेता का नाम है। ऐसा क्यों?
उप-निबंधक कार्यालय में रजिस्ट्री होने से राजस्व अभिलेख नहीं बदलता। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 के अंतर्गत तहसीलदार के समक्ष दाखिल-ख़ारिज का आवेदन अलग से करना पड़ता है।
क्या कृषि भूमि का बंटवारा सिविल न्यायालय में हो सकता है?
भूमिधरी कृषि भूमि का बंटवारा सामान्यतः उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 116 के अंतर्गत एसडीएम के समक्ष राजस्व वाद के रूप में होता है, सिविल वाद के रूप में नहीं। मकान और ग़ैर-कृषि संपत्ति का बंटवारा सिविल न्यायालय में होता है।
मेरी संपत्ति पर फ़र्ज़ी बैनामा रजिस्टर्ड हो गया है। अब क्या करूँ?
आप विशिष्ट अनुतोष अधिनियम की धारा 31 के अंतर्गत बैनामा निरस्त कराने का वाद दायर कर सकते हैं, प्रायः निषेधाज्ञा के साथ, और कूटरचना व धोखाधड़ी की आपराधिक शिकायत साथ-साथ चल सकती है। जल्दी कदम उठाएँ, इससे पहले कि संपत्ति आगे बेच दी जाए।
विक्रेता ने मेरा बयाना ले लिया और अब बैनामा रजिस्टर्ड नहीं करा रहा।
आप तीन साल के भीतर विक्रय अनुबंध के विनिर्दिष्ट पालन का वाद दायर कर सकते हैं। 2018 से न्यायालयों को वैध अनुबंध सामान्यतः लागू कराना ही होता है, पर आपको यह दिखाना होगा कि आप शेष रकम चुकाने के लिए हमेशा तैयार और तत्पर रहे।
गाज़ियाबाद में संपत्ति ख़रीदने से पहले क्या जाँचना चाहिए?
कम से कम 30 साल के स्वामित्व दस्तावेज़, उप-निबंधक कार्यालय में भार की खोज, भूमि के लिए तहसील की खतौनी, प्लॉट और भवन के लिए जीडीए या संबंधित प्राधिकरण की स्वीकृतियाँ, परियोजनाओं के लिए उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) का पंजीकरण, और विक्रेता के विरुद्ध लंबित मुकदमे।
यह कानून की सामान्य जानकारी है, आपके मामले की सलाह नहीं। तथ्य बदलने से नतीजे बदल जाते हैं, इसलिए अपने मामले के बारे में किसी अधिवक्ता से बात करें।